Pathankot Mandi Fourlane : शाहपुर बाजार में फोरलेन निर्माण पर बवाल, दुकानदारों ने पीछे हटने से किया इनकार

Posted by

पठानकोट मंडी फोरलेन ( pathankot  mandi fourlane) का काम लगभग जोरों शोरों पर है और अब शाहपुर बाजार में भी फोरलेन निर्माण कार्य तेजी आई है। कारोबारियों ने स्वेच्छा से 30 मीटर तक अपनी दुकानें हटा ली हैं, लेकिन अब इससे आगे एक मीटर भी पीछे हटने को वे तैयार नहीं हैं। दुकानदारों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शासन, प्रशासन, और निर्माण कंपनी ने और अधिक दबाव डाला, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

Pathankot Mandi Fourlane

 

Pathankot Mandi Fourlane पर जनता के सवाल

दुकानदारों का सवाल है कि जब स्थानीय विधायक, सांसद, और सड़क परिवहन मंत्री शाहपुर बाजार के संरक्षण की बात कर रहे हैं, तो वे कौन सी अदृश्य ताकतें हैं जो बाजार को उजाड़ने पर आमादा हैं?

 

हर दिन दुकानदारों पर अपनी दुकानें खाली करने का दबाव बनाया जा रहा है, जिसे *शाहपुर बाजार बचाओ संघर्ष समिति* किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेगी। समिति के सदस्य बंटू भाटिया, सचिन महाजन, विपिन वर्मा, आशीष शर्मा, सोनू वाही, नीरज महाजन, प्रतीक महाजन, ललित कुमार, और मोनू चौधरी ने कहा कि वे फोरलेन निर्माण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन व्यापारियों का रोजगार भी सुरक्षित रहना चाहिए।

 

उनका तर्क है कि देश में कई स्थानों पर 30 मीटर से कम चौड़ाई में भी फोरलेन सड़कें बनी हैं, तो शाहपुर में ऐसा क्यों नहीं हो सकता? सांसद राजीव भारद्वाज के प्रयासों से पहले ही तीन मीटर की राहत मिल चुकी है, जिसे सड़क परिवहन राज्य मंत्री ने सैद्धांतिक स्वीकृति भी दी है। फिर भी कुछ ताकतें दुकानदारों से लिखित आदेश लाने का दबाव क्यों बना रही हैं?

 

दुकानदारों ने दो-टूक कहा है कि वे 30 मीटर चौड़ी सड़क के लिए पहले ही सहमति दे चुके हैं, लेकिन अब और पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता।

 

( Shahpur Fourlane ) शाहपुर बाजार में फोरलेन निर्माण के कारण हो रहे विवाद और Pathankot Mandi Fourlane से जुड़े घटनाक्रम के कई संभावित नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं

Pathankot Mandi Fourlane के शाहपुर बाजार में प्रभाव

1. **व्यवसायों का नुकसान**:

दुकानदारों को अपनी दुकानों का हिस्सा तोड़ने से व्यापार में गिरावट का सामना करना पड़ेगा। ग्राहकों की संख्या कम हो सकती है, जिससे आर्थिक संकट गहराएगा।

 

2. **रोजगार पर प्रभाव**:

दुकानों के हटने या बंद होने से दुकानदारों के साथ-साथ उनके कर्मचारियों की नौकरियां भी खतरे में पड़ सकती हैं।

 

3. **स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर**:

बाजार की गतिविधियां ठप होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था कमजोर होगी। व्यापार में गिरावट का असर आसपास के क्षेत्रों में भी दिख सकता है।

 

4. **सामाजिक अशांति**:

निर्माण के दबाव के कारण दुकानदारों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है। आंदोलन की चेतावनी से कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा है।

 

5. **जनता को असुविधा**:

निर्माण कार्य के कारण यातायात बाधित होगा, जिससे स्थानीय लोगों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

 

6. **भावनात्मक और सांस्कृतिक क्षति**:

पुरानी दुकानों और प्रतिष्ठानों के टूटने से लोगों के भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव पर भी असर पड़ेगा। बाजार का पारंपरिक रूप बदल जाएगा।

 

7. **कानूनी विवाद**:

यदि सहमति नहीं बनती, तो दुकानदार कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं, जिससे प्रोजेक्ट में देरी होगी और लागत बढ़ेगी।

 

ये नुकसान स्थानीय प्रशासन और व्यापारियों के लिए बड़ी चुनौतियां पैदा कर सकते हैं, इसलिए संतुलित समाधान आवश्यक है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *