Bhanupali Bilaspur Leh Railway Line भारत की सबसे कठिन रेल परियोजना

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भारत सरकार की एक महत्त्वाकांक्षी योजना Bhanupali Bilaspur Leh Railway Line है, जो हिमाचल प्रदेश और लद्दाख को रेलवे नेटवर्क से जोड़ेगी। यह परियोजना रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत-चीन सीमा तक रेलवे संपर्क प्रदान करेगी। लेकिन इस रेलवे लाइन को बनाने में कई बड़ी चुनौतियां हैं, जिनमें तकनीकी, भौगोलिक और वित्तीय समस्याएं शामिल हैं।

*Bhanupali Bilaspur Leh Railway Line परियोजना का परिचय*

– *कुल लंबाई*: 465 किलोमीटर
– *राज्य*: हिमाचल प्रदेश और लद्दाख
– *रेलवे जोन*: उत्तरी रेलवे
– *कुल अनुमानित खर्च*: ₹1.40 लाख करोड़ (2023 के अनुमान के अनुसार)
– *समाप्ति की संभावित तिथि*: 2040 तक (यदि कार्य सुचारू रूप से चले)

*बड़ी चुनौतियाँ*

 

1. *दुर्गम और ऊँचाई वाला क्षेत्र*

यह रेलवे लाइन दुनिया की सबसे ऊँची रेलवे लाइनों में से एक होगी। इसमें कुछ हिस्से 5,300 मीटर (17,400 फीट) से अधिक ऊँचाई पर होंगे, जो *चीन के क़िंगहाई-तिब्बत रेलवे* के बाद दुनिया की दूसरी सबसे ऊँची रेलवे लाइन होगी। इतनी ऊँचाई पर ऑक्सीजन की कमी, तापमान में अत्यधिक गिरावट और भूगर्भीय अस्थिरता जैसी चुनौतियाँ आती हैं।

2. *अत्यधिक ठंड और हिमपात*

लद्दाख और ऊँचाई वाले इलाकों में सर्दियों में *-40°C तक तापमान* गिर सकता है, जिससे रेलवे ट्रैक और सुरंगों की मरम्मत एवं रखरखाव मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, भारी हिमपात से ट्रेन संचालन प्रभावित हो सकता है।

3. *भूकंप और भूस्खलन का खतरा*

हिमालयी क्षेत्र भूकंप संभावित जोन (Seismic Zone IV & V) में आता है। इस क्षेत्र में *भूकंप, भूस्खलन और हिमस्खलन* (Avalanche) की संभावना अधिक रहती है, जिससे निर्माण कार्य चुनौतीपूर्ण बन जाता है।

4. *पर्यावरणीय और पारिस्थितिकीय प्रभाव*

रेलवे लाइन के लिए बड़े पैमाने पर खुदाई और कटाई करनी होगी, जिससे हिमालय के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव पड़ सकता है। वन्यजीवों और वनस्पतियों को नुकसान पहुँचने का खतरा रहेगा, जिसे संतुलित करना जरूरी होगा।

5. *बड़े पैमाने पर सुरंगों का निर्माण*

रेलवे मार्ग का लगभग *50% से अधिक हिस्सा सुरंगों में होगा*, जिससे निर्माण लागत और समय बढ़ जाएगा। साथ ही, इतनी ऊँचाई पर सुरंग बनाने के लिए विशेष तकनीकों और श्रमिकों की जरूरत होगी।

6. *उच्च निर्माण लागत*

चूँकि यह परियोजना हिमालय के कठिन इलाकों में बनाई जा रही है, इसलिए इसमें अनुमानित लागत *₹1.40 लाख करोड़* तक हो सकती है। यह भारत की सबसे महंगी रेलवे परियोजनाओं में से एक होगी।

*परियोजना के फायदे*

 

1. *रणनीतिक महत्व*

– यह रेलवे लाइन भारतीय सेना के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगी।
– चीन की सीमा तक रेल संपर्क बढ़ेगा, जिससे सेना को रसद और हथियार जल्दी पहुँचाए जा सकेंगे।
– सियाचिन ग्लेशियर और कारगिल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों तक पहुँच आसान होगी।

2. *पर्यटन और आर्थिक विकास*

– यह रेलवे लाइन हिमाचल और लद्दाख में पर्यटन को बढ़ावा देगी।
– लेह और उसके आसपास के इलाकों में होटलों, रेस्तरां, और ट्रेकिंग व्यवसायों को फायदा मिलेगा।
– स्थानीय लोगों को नए रोजगार के अवसर मिलेंगे।

3. *स्थानीय लोगों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी*

– अभी लद्दाख और हिमाचल के ऊँचाई वाले इलाकों में केवल सड़क मार्ग से ही पहुँचा जा सकता है, जो सर्दियों में बंद हो जाता है।
– रेलवे लाइन से इन क्षेत्रों के लोगों को सालभर बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी।

4. *माल ढुलाई और व्यापार को बढ़ावा*

– लद्दाख में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सस्ती और आसान होगी।
– व्यापार और लघु उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।

*निष्कर्ष*

भानुपाली-बिलासपुर-लेह रेलवे लाइन भारत की सबसे चुनौतीपूर्ण लेकिन महत्वपूर्ण रेलवे परियोजनाओं में से एक है। यह परियोजना देश की सुरक्षा, पर्यटन और आर्थिक विकास के लिए बहुत फायदेमंद होगी। हालाँकि, इसे पूरा करने में समय, तकनीक और भारी निवेश की जरूरत होगी। यदि इस परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा किया जाता है, तो यह भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का एक अद्भुत उदाहरण बनेगी और भविष्य में अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में रेलवे विस्तार के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी।

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