indian railway : पिछले कुछ दिनों से आप ऐसी खबरें देख रहे होंगे कि रेल हादसों की संख्या बढ़ गई है ट्रेन लेट हो रही है सीट नहीं मिल रही है भीड़ बढ़ गई है और तो और रेलवे का किराया महंगा हो रहा है इन कारणों से रेलवे की आलोचना भी हो रही है लोग पूछ रहे हैं कि रेलवे कर क्या रहा है आखिर बदलाव कब होंगे indian railway 2 को वर्ल्ड क्लास बनने में और कितना समय लगेगा इन सवालों के के बीच रेलवे ने अपने मेकओवर का नया प्लान पेश किया है इसका ऐलान खुद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किया है यह प्लान अगले 5वर्षों में रेलवे की बढ़ती डिमांड को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है

अगर इस प्लान के मुताबिक काम हो गया तो ट्रेन में सीट नहीं मिलने से लेकर इसके देर होने की समस्या तक दोनों खत्म हो जाएंगी रेलवे फिलहाल दो प्लांस पर काम कर रहा है
रेलवे का ( indian railway ) प्लान क्या है
पहले प्लान में ट्रेन की संख्या बढ़ाई जाएगी इसके लिए 5 वर्ष के समय सीमा तय की गई है दूसरे प्लान में रेलवे ट्रैक्स की संख्या बढ़ाई जाएगी इसके लिए 10 वर्षों की समय सीमा तय की गई है अब एक-एक कर दोनों प्लान की बात करेंगे मौजूदा समय में भारतीय रेलवे से हर वर्ष 800 करोड़ यात्री यात्रा करते हैं रेलवे का अनुमान है कि अगले चार-पांच वर्षों में हर वर्ष यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या 1 करोड़ हो जाएगी
अब जब यात्री बढ़ेंगे तो उनके लिए नई ट्रेन भी चाहिए जिसके लिए सरकार ने अगले 5 वर्षों में 3000 ट्रेन चलाने का ऐलान किया है अभी भारतीय रेलवे में 13169 ट्रेनें चलती हैं प्लान के मुताबिक इसमें 3000 और ट्रेनें जुड़ जाएंगी तो ट्रेनों की संख्या बढ़कर 16000 से ज्यादा हो जाएगी फिलहाल रेलवे के लिए 69000 नए कोच उपलब्ध हैं और हर वर्ष रेलवे करीब 5000 नए कोच बना रहा है इन सभी प्रयासों से रेलवे हर वर्ष 200 से 250 नई ट्रेनें आसानी से ला सकता है
रेलवे को अगले 5 वर्षों में 3000 ट्रेनें चलाने के लिए अपने प्रोडक्शन को डबल करना होगा वैसे आपको बता दें कि अभी जो 250 ट्रेनें बन रही हैं वह 400 से 500 वंदे भारत ट्रेनों से अलग हैं वंदे भारत ट्रेनों का सरकार के इस ऐलान से कोई लेना देना नहीं है अब दूसरे प्लान की बात करते हैं सरकार जब 3000 नई ट्रेनें चला रही है तो इसके लिए नई पटरियों की जरूरत होगी जिसे देखते हुए रेलवे ने सात नए रूटों पर मल्टी ट्रैक बनाने का प्लान बनाया है इसके लिए 10 वर्ष की समय सीमा तय की गई है इसमें 420000 करोड़ रए खर्च होंगे रेलवे ने इसका प्लान तैयार करके केंद्रीय कैबिनेट को भेज दिया है लेकिन अभी अप्रूवल नहीं मिला है
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आप देखते होंगे कि indian railway की पटरियों पर एक बार में अभी दो ट्रेनें चलती हैं सामान्यत एक आने वाली और एक जाने वाली सरकार की कोशिश है कि सात रूटों पर मल्टी ट्रैक्स हो यानी एक दो नहीं बल्कि एक ही रूट पर पांच से छह रेलवे ट्रैक्स होंगे जिससे कई ट्रेनें एक साथ चल सकती हैं
चीन और जापान जैसे देशों में ऐसा ही होता है इस प्लान के हिसाब से 1531 किमी के दिल्ली हावड़ा रूट 1968 किमी के मुंबई हावड़ा रूट 1386 किमी के दिल्ली मुंबई रूट 18611 किमी के दिल्ली गुवाहाटी रूट 2175 किमी के दिल्ली चेन्नई रूट 1661 किमी के हावड़ा चेन्नई रूट 1268 किमी के मुंबई चेन्नई रूट पर मल्टी ट्रैक बनाए जाएंगे यानी एक दो नहीं कई ट्रैक बिछाए जाएंगे जिससे कई ट्रेनें एक साथ आ जा सकें इतना ही नहीं मल्टी ट्रैक के अलावा रेलवे हर वर्ष लगभग 5000 किमी नए ट्रैक बिछा रहा है
यह उन इलाकों में हो रहा है जहां अब तक रेल की पटरियां नहीं पहुंची थी यानी रेलवे इस कोशिश में है कि ज्यादा पटरियों के जरिए रेलवे ट्रैक्स पर ट्रैफिक कम किया जा सके जिससे ट्रेनों की स्पीड बढ़े रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पीड बढ़ने के मामले में तो यह तक कहा है कि लंबे रूट की ट्रेनों की गति बढ़ाने और धीमी करने में लगने वाले समय को कम करना बहुत जरूरी है क्योंकि निर्धारित स्टेशंस पर रुकने के अलावा ट्रेनों को मार्ग के कई मोड़ों पर गति कम करनी पड़ती है वैसे ट्रेन की स्पीड को बढ़ाने के लिए सरकार ओवर ब्रिज और अंडरपास के निर्माण को तेज करने की कोशिश में लगी है
अंडरपास नहीं होने से कई बार शहर से गुजर रही ट्रेन की स्पीड को कम करना पड़ता है ताकि किसी तरह का हादसा ना हो इसके लिए सरकार ने 1000 से ज्यादा रेलवे ओवर ब्रिज और अंडरपास को मंजूरी दी है साल 20222 में 1002 फ्लाई ओवर और अंडरपास का निर्माण किया गया था जबकि इस वर्ष 1200 फ्लाईओवर और अंडरपास के निर्माण का टारगेट है यानी पिछली बार से 20 फीसद ज्यादा इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि भारतीय रेलवे अभी कई मामलों में चीन और जापान से बहुत पीछे है लेकिन यह भी सच है कि indian railway ने पिछले कुछ वर्षों में कई सुधार किए हैं
अगर रेलवे अपने फ्यूचर प्लान को सही से लागू कर पाया तो अगले पाच वर्षों में रेलवे मौजूदा indian railway से बिल्कुल अलग होगी हाईटेक होगी मॉडर्न होगी स्पीड वाली होगी और जापान चीन और यूरोप की टक्कर की होगी






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