बरसात के दोनों में नदियों का जलस्तर बाढ़ जाता है और नदियां उफान पर होती हैं और इसी प्रकार बांधो का पानी में बाढ़ जाता है आज हम बात करेंगे पोंग बाँध (pong dam) की जो की महाराणा प्रताप सागर झील तलवाड़ा में प्यास नदी के ऊपर स्थित है अक्सर देखा गया है की बरसात के दिनों में पोंग बाँध (pong dam) से पानी छोड़ा जाता है और व्यास नदी के किनारे बसे लोगों को और नदी किनारे की गयी कृषि जलस्तर बढने से प्रभावित होती है
लेकिन क्या कभी किसी ने सोचा है अगर पोंग बाँध का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर हो जाए तो क्या होगा अगर पोंग बाँध का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर पहुंच जाता है तो यकीनन पोंग बाँध (pong dam) के गेट खोल ही जाएंगे और गेट खोलने की वजह से व्यास दरिया के किनारे बसे गाँवों में बहुत ही ज्यादा भयानक बाढ़ की स्थिति बनेगी क्योंकि ब्यास नदी के किनारे सबसे ज्यादा प्रभाव नदी के किनारे बसे गाँवों में देखा जाएगा जिसकी वजह से riyali ,ghandran,badukhar,mand manjwah,mand miani,malkana,bela indora,paral आदि गाँवों से लेकर पंजाब तक का जो इलाका है यहाँ बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाएगी और स्थिति बहुत ही ज्यादा भयानक होगी
एक जानकारी के अनुसार वर्ष 1988 में पोंग बाँध से पानी छोड़ गया था और पानी छोड़ने की वजह से आसपास के इलाकों में दरिया के किनारे बसे गाँवों में बहुत ही ज्यादा बाढ़ आ गई थी जिसकी वजह से लोग बेघर हो गए थे लेकिन अगर भविष्य में भी कभी पोंग बाँध से पानी छोड़ जाएगा तो इस बार ज्यादा इलाका बाढ़ की चपेट में आ सकता है क्योंकि हिमाचल में ब्यास नदी के किनारे वाले इलाके में क्रेशर उद्योग लगे होने की वजह से भूमि काफी जयादा खोदी गयी है जिसकी वजह से भूमि कटाव ज्यादा होगा
वर्ष २०२३ में पोंग बाँध (pong dam) का जलस्तर बढने की वजह से हिमाचल के इन्दौरा तहसील के कई गाँवों में काफी भयानक बाढ़ आई






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